राजपथ पर गूंजते कदम: 26 जनवरी की परेड में CRPF का नेतृत्व करने वाली असिस्टेंट कमांडेंट पूनम गुप्ता की गौरवगाथा
क्या आपने कभी गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) की वह भव्य परेड टीवी पर देखी है? राजपथ (जिसे अब कर्तव्य पथ कहा जाता है) पर जब देश की सेना और पुलिस की टुकड़ियां कदम-ताल करते हुए पूरे अनुशासन के साथ निकलती हैं, तो पूरा देश असीम गर्व से भर उठता है। उस पल हर भारतीय का सीना चौड़ा हो जाता है।
आज नवोदय पाठशाला के इस ब्लॉग में हम आपको एक ऐसी ही सशक्त और फौलादी महिला की कहानी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने न सिर्फ इस राष्ट्रीय परेड में हिस्सा लिया, बल्कि अपनी पूरी प्लाटून का सीना तानकर नेतृत्व भी किया! यह गौरवशाली दास्तान है केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की असिस्टेंट कमांडेंट और नवोदय की पूर्व छात्रा पूनम गुप्ता की।
वर्दी, जज़्बा और 'प्रथम स्थान' का ऐतिहासिक गौरव
पूनम गुप्ता जी वर्तमान में विश्व के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल 'CRPF' में असिस्टेंट कमांडेंट (Assistant Commandant) के अत्यंत चुनौतीपूर्ण और उच्च पद पर तैनात हैं। उनके जीवन का एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक क्षण तब आया, जब उन्हें 26 जनवरी की प्रतिष्ठित गणतंत्र दिवस परेड में CRPF कंटीजेंट (महिला टुकड़ी) का नेतृत्व करने का सुनहरा अवसर मिला।
सबसे अधिक गर्व और हर्ष की बात यह रही कि उनके शानदार और अनुशासित नेतृत्व में उनकी टुकड़ी ने उस वर्ष की परेड में 'प्रथम स्थान' (Popular Choice Category में) हासिल किया! इस वर्ष की परेड महिलाओं की शक्ति (Women Empowerment/Nari Shakti) को समर्पित थी, जिसमें पूनम जी सबसे आगे की पंक्ति में खड़ी होकर आधी आबादी की अपार शक्ति का प्रदर्शन कर रही थीं।
महिला सशक्तिकरण के 3 अजेय 'मूल मंत्र' (3 Pillars of Empowerment)
पूनम जी का दृढ़ विश्वास है कि बेटियां ही इस समाज का असली भविष्य हैं। एक असिस्टेंट कमांडेंट होने के नाते वह मानती हैं कि किसी भी महिला या बच्ची को सही मायनों में सशक्त बनाने के लिए तीन स्तंभ (Pillars) सबसे ज्यादा जरूरी हैं:
- न्यूट्रिशन (सही पोषण / Health): एक स्वस्थ शरीर में ही एक तेज मस्तिष्क और ईश्वर का वास होता है। इसलिए महिलाओं और बच्चियों का शारीरिक रूप से तंदुरुस्त (Fit) और मजबूत होना सफलता की सबसे पहली शर्त है।
- एजुकेशन (शिक्षा / Mental Strength): शिक्षा इंसान को हर तरह की ताकत देती है। यह सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं देती, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में आपकी 'मानसिक' (Mental) और 'भावनात्मक बुद्धिमत्ता' (Emotional Intelligence) को बहुत मजबूत बनाती है।
- फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस (आर्थिक स्वतंत्रता): जब एक महिला कमाती है और अपने पैरों पर खड़ी होती है, तो उसे अपनी जिंदगी के सही या गलत फैसले लेने के लिए किसी और पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
नवोदय: सिर्फ ईंट-गारे की बिल्डिंग नहीं, एक 'परिवार'
पूनम जी का नवोदय विद्यालय से नाता बेहद गहरा और भावनात्मक रहा है। उनके पिताजी स्वयं नवोदय विद्यालय में पदस्थ हैं, और पूनम जी ने भी अपनी 9वीं और 10वीं कक्षा की पढ़ाई नवोदय के उसी शानदार माहौल से की है। वह बड़े गर्व से कहती हैं— "नवोदय मेरे लिए सिर्फ एक स्कूल नहीं, बल्कि मेरा घर रहा है।"
नवोदय की सबसे बड़ी खासियत बताते हुए वह एक बहुत ही मार्मिक बात कहती हैं:
"नवोदय का सबसे खूबसूरत पहलू यह है कि आप देश के किसी भी नवोदय से पढ़े हों, अगर आप भारत के किसी भी कोने में किसी अनजान नवोदयन से मदद मांगेंगे, तो वह व्यक्ति अपने सारे काम छोड़कर दौड़कर आपकी मदद करने आएगा। यह एक बहुत बड़ा परिवार (Brotherhood/Sisterhood) है।"
देश की बेटियों के लिए पूनम जी का खास संदेश
अपने अनुभव के खजाने से, असिस्टेंट कमांडेंट पूनम गुप्ता ग्रामीण परिवेश से आने वाली हमारी सभी बेटियों को एक बहुत ही दमदार और खास सलाह देती हैं:
पूनम गुप्ता जी की यह कहानी सिर्फ एक सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि देश की हर उस बेटी के लिए एक बहुत बड़ा 'रोल मॉडल' है, जो अपनी मेहनत के दम पर खाकी वर्दी पहनने और इस देश की रक्षा करने का सपना देखती है। उनकी यह शानदार यात्रा हमें सिखाती है कि बेटियां अब केवल घर तक सीमित नहीं हैं; वे राजपथ पर देश का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं!
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