छोटे गाँव से इंटरनेशनल रिंग तक: हौसले की मिसाल मनीषा वाला

JNV Kodinar, Gujarat International Kickboxer Mental Health Professional
Manisha Vala Kickboxer

मनीषा वाला, गुजरात के एक छोटे से गाँव से निकलकर इंटरनेशनल लेवल पर भारत का प्रतिनिधित्व करना — यह कहानी है मनीषा वाला की। किक बॉक्सिंग में चार बार भारत को इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर गौरवान्वित कर चुकीं मनीषा, आज न केवल एक सफल खिलाड़ी हैं, बल्कि एक मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल के रूप में भी समाज में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।

"मैं भारत का वर्ल्ड कप में प्रतिनिधित्व करने को लेकर बेहद उत्साहित हूं। यह मेरे लिए एक सपने के पूरे होने जैसा है..."

आज जब हम नारी सशक्तिकरण और सपनों को हकीकत में बदलने की बातें करते हैं, तब मनीषा वाला जैसे व्यक्तित्व का सफर हमें यह सिखाता है कि सच्ची मेहनत, परिवार का समर्थन और सही दिशा मिल जाए तो कोई भी लड़की हर बाधा को पार कर सकती है।

एक छोटे गाँव से बड़ा सपना

मनीषा वाला गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के एक छोटे से गाँव कोडीनार से ताल्लुक रखती हैं। वह अपने स्कूल और गाँव की पहली लड़की थीं जिसने नवोदय विद्यालय में प्रवेश लिया। उन्होंने प्रवेश परीक्षा पास कर जवाहर नवोदय विद्यालय (जेएनवी) कोडीनार में छठी कक्षा में प्रवेश लिया और 12वीं तक वहीं पढ़ाई की।

नवोदय से मिली दिशा

हजारों लाखों बच्चों के जीवन की तरह नवोदय विद्यालय ने मनीषा के जीवन को भी एक नई दिशा दी। जेएनवी में न केवल शिक्षा का स्तर बेहतरीन था, बल्कि खेल, संगीत, नृत्य, सामाजिक कार्य जैसे सह-पाठ्यक्रमों में भी छात्रों को बराबर मौका दिया जाता था। नवोदय की दिनचर्या ने उनमें अनुशासन, समय प्रबंधन और कठिन परिश्रम की आदत डाल दी।

"अगर नवोदय विद्यालय में न पढ़ती, तो आज इस मुकाम तक नहीं पहुँच पाती। नवोदय ने मेरी सोच को बड़ा बनाया, आत्मविश्वास दिया और हर मुश्किल को पार करने की हिम्मत दी।"

उच्च शिक्षा और संघर्षों का दौर

बारहवीं के बाद वह अपने ग्रेजुएशन के लिए वडोदरा चली गईं और एमएस यूनिवर्सिटी से इंडस्ट्रियल साइकोलॉजी में स्नातक किया। इसके बाद टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS), मुंबई से सामाजिक कार्य (मानसिक स्वास्थ्य) में अपनी मास्टर डिग्री प्राप्त की।

पढ़ाई और खेल के बीच तालमेल बैठाना आसान नहीं था। पिता की कंपनी बंद हो जाने से परिवार को भारी वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा। समाज के बहुत से लोगों ने माता-पिता को रोका कि "लड़की पर इतना खर्च मत करो, कल को शादी कर के चली जाएगी।" मगर माता-पिता का स्पष्ट उत्तर था — “हम खर्च नहीं, निवेश कर रहे हैं।”

एक महिला, एक मिशन: किकबॉक्सिंग में भारत का नाम रोशन

मनीषा वाला गुजरात की पहली महिला बनीं जिन्हें भारतीय टीम में 7वें अंतर्राष्ट्रीय तुर्की ओपन किकबॉक्सिंग विश्व कप के लिए चुना गया। उन्होंने आत्मरक्षा (Self Defense) के रूप में किकबॉक्सिंग सीखना शुरू किया था और जल्द ही यह उनका जुनून बन गया।

Manisha Vala का किकबॉक्सिंग सफर: उपलब्धियों की समयरेखा

  • 7वें अंतर्राष्ट्रीय तुर्की ओपन से 14 महीने पहले आत्मरक्षा के लिए किकबॉक्सिंग शुरू की
  • नवंबर 2022 दूसरे इंडियन ओपन इंटरनेशनल किकबॉक्सिंग टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीता
  • 10-19 दिसंबर, 2022 एशियाई किकबॉक्सिंग चैंपियनशिप में दो कांस्य पदक जीते
  • फरवरी 2024 तीसरे इंडियन ओपन इंटरनेशनल किकबॉक्सिंग टूर्नामेंट में रजत पदक हासिल किया

चुनौतियाँ और समाधान

गुजरात सरकार में किकबॉक्सिंग पंजीकृत नहीं होने के कारण, उन्हें अपनी अधिकांश यात्रा और प्रशिक्षण लागत स्वयं वहन करनी पड़ी। इन चुनौतियों के बावजूद, मनीषा हमेशा अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करती रहीं। आज वे टाटा ट्रस्ट जैसे प्रतिष्ठित संगठनों के साथ कार्य कर रही हैं और अपनी स्थिर नौकरी के ज़रिये अपने खेल का खर्च खुद उठाती हैं।

सम्मान, पहचान और भविष्य की उड़ान

अगस्त 2022 में खेल के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें 'गुजरात मानव रत्न' पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनका अंतिम लक्ष्य ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करना है।

"बाहर की दुनिया में बहुत से डिस्ट्रैक्शन मिलेंगे, लेकिन अपने गोल पर फोकस रखो। आत्मनिर्भर बनो, खुद को कमजोर मत समझो। जब समस्या आए तो समाधान ढूंढें — प्रॉब्लम पर नहीं, सॉल्यूशन पर ध्यान दें।"

क्या आप भी अपनी बेटी को मनीषा की तरह आत्मनिर्भर और सफल बनाना चाहते हैं?

सपनों को उड़ान देने के लिए एक सही मंच की ज़रूरत होती है। नवोदय पाठशाला लेकर आया है जवाहर नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा के लिए विशेष तैयारी बैच। आज ही जुड़ें और अपने बच्चों को दें सफलता की सही दिशा।

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