1 टेबल, 1 चेयर और 1 लैपटॉप से खड़ी की मल्टीनेशनल सॉफ्टवेयर कंपनी
अक्सर जब हम कोई बड़ा काम या खुद का बिजनेस शुरू करने की सोचते हैं, तो सबसे पहला बहाना यही होता है कि— "मेरे पास संसाधन (Resources) नहीं हैं, पैसे नहीं हैं या बड़ा ऑफिस नहीं है।"
लेकिन आज नवोदय पाठशाला के इस ब्लॉग में हम आपको एक ऐसे नवोदयन की कहानी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने यह साबित कर दिया कि बिजनेस ईंट-गारे की शानदार बिल्डिंग से नहीं, बल्कि एक मजबूत विजन (Vision) और फौलादी दृढ़ निश्चय से खड़ा होता है। यह कहानी है जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV), राजकोट के 1999 बैच के पूर्व छात्र हिरेन मानसूरिया की, जो आज एक बेहद सफल मल्टीनेशनल सॉफ्टवेयर कंपनी (MNC) के मालिक हैं!
लोअर मिडिल क्लास फैमिली और नवोदय की वो 'घंटी'
हिरेन एक बेहद सामान्य, लोअर मिडिल क्लास (निम्न मध्यम वर्गीय) परिवार से आते हैं। बचपन में जब उनका दाखिला जेएनवी (JNV) में हुआ, तो वहां की लाइफस्टाइल ने उनके जीवन को हमेशा के लिए बदल कर रख दिया।
हिरेन आज भी उन दिनों को याद करते हुए बताते हैं, "नवोदय में बहुत छोटी उम्र में एडमिशन हो जाता है और वहां हमें अपने कपड़े धोने से लेकर स्कूल के लिए तैयार होने तक, सब कुछ खुद करना पड़ता है। सुबह 5 बजे उठने से लेकर रात 10 बजे सोने तक की पूरी जिंदगी एक घंटी (Bell) के हिसाब से चलती है।"
इसी रूटीन ने उनके अंदर गजब का अनुशासन (Discipline) और सेल्फ-कॉन्फिडेंस पैदा किया। हॉस्टल में शिक्षकों ने माता-पिता से भी ज्यादा उनकी देखभाल की, जिससे उनका स्टेज फियर (मंच का डर) पूरी तरह खत्म हो गया और वे भीड़ में भी चमकने लगे।
"मैंने कभी जिंदगी में 'सेकंड रैंक' नहीं देखी..."
नवोदय में मिली होलिस्टिक (सर्वांगीण) शिक्षा का ऐसा गहरा असर रहा कि हिरेन को हमेशा 'टॉपर' रहने की आदत पड़ गई। स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) में इंजीनियरिंग की। कॉलेज के दौरान भी वह लगातार अपनी यूनिवर्सिटी के टॉपर रहे और उन्होंने गोल्ड मेडल (Gold Medal) हासिल किया। वह गर्व से कहते हैं— "मैंने अपनी जिंदगी में कभी सेकंड रैंक नहीं देखी है।"
एक भयानक हादसा और वापसी: लेकिन ज़िंदगी हमेशा सीधी लाइन में नहीं चलती। इंजीनियरिंग के 5वें सेमेस्टर की परीक्षा देकर लौटते वक्त हाईवे पर उनका एक बेहद भयानक एक्सीडेंट हो गया। किस्मत से उन्होंने हेलमेट पहना हुआ था, जिसने उनकी जान बचा ली। ऐसे खौफनाक हादसों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी, तुरंत वापसी की और अपनी पढ़ाई में अव्वल बने रहे।
1 लैपटॉप से मल्टीनेशनल कंपनी तक का सफर
इंजीनियरिंग के बाद हिरेन ने किसी सुरक्षित और आरामदेह नौकरी (Job) में जाने के बजाय अपना खुद का बिजनेस (सॉफ्टवेयर कंपनी) शुरू करने का बड़ा रिस्क लिया।
आज से 15 साल पहले, जब उन्होंने शुरुआत की थी, तब उनके पास न तो कोई बड़ा इन्वेस्टर था और न ही कोई आलीशान ऑफिस। उनकी कंपनी की शुरुआत सिर्फ 1 टेबल, 1 चेयर और 1 लैपटॉप से हुई थी! लेकिन अपनी कड़ी मेहनत, बेदाग कोडिंग और शानदार विजन के दम पर, आज उन्होंने इसे एक मल्टीनेशनल कंपनी (MNC) में बदल दिया है।
नए स्टार्टअप्स और युवाओं के लिए हिरेन जी की 3 'गोल्डन टिप्स'
अगर आप भी भविष्य में अपना स्टार्टअप या बिजनेस करना चाहते हैं, तो हिरेन जी की इन 3 बातों को पत्थर की लकीर मान लें:
- अपनी टीम (Employees) का ख्याल रखें: आपकी कंपनी तभी ग्रो करेगी जब आपकी टीम खुश होगी। अगर आपके कर्मचारी खुश हैं, तो वे आपके ग्राहकों (Customers) का बहुत अच्छे से ख्याल रखेंगे।
- फाइनेंशियल लिटरेसी (वित्तीय साक्षरता): अगर आपके स्टार्टअप को कोई फंडिंग (पैसे) मिलती है, तो उसे बेवजह महंगे ऑफिस या शौक में न उड़ाएं। एक अच्छा बजट बनाएं, अपने खर्चों को कंट्रोल करें और पैसे का सही इस्तेमाल करना सीखें।
- सस्टेनेबल बिजनेस बनाएं: किसी भी बाहरी इन्वेस्टर (निवेशक) के पैसों पर हमेशा निर्भर रहने के बजाय अपनी कंपनी को जल्द से जल्द खुद के दम पर (Self-reliant) खड़ा करने की कोशिश करें।
हिरेन मानसूरिया जी का सफर चीख-चीख कर यह कहता है कि अगर आपके अंदर सफल होने की असली भूख है, तो आप दुनिया के किसी भी 'असंभव' काम को 'संभव' बना सकते हैं। बहाने बनाना छोड़ें, एक लैपटॉप उठाएं, विजन बनाएं और दुनिया फतह करने के लिए निकल पड़ें!
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