नवोदय से संसद तक का सफर: एजुकेशन लोन लेकर पढ़ाई करने वाले डॉ. हेमांग जोशी कैसे बने लोकसभा सांसद?
जब भी कोई मेधावी छात्र स्कूल में 'साइंस' (Science) चुनता है, तो समाज और उसका परिवार यही मान लेता है कि वह भविष्य में या तो एक शानदार डॉक्टर बनेगा या फिर कोई बड़ा इंजीनियर। लेकिन, क्या हो अगर एक मेडिकल का छात्र अपने करियर के बीच में समाज सेवा और राजनीति का अखाड़ा चुन ले और अपनी मेहनत के दम पर सीधा देश की सर्वोच्च पंचायत यानी 'संसद' (Parliament) में जाकर बैठ जाए?
आज नवोदय पाठशाला के इस विशेष ब्लॉग में हम आपके लिए लेकर आए हैं गुजरात के वडोदरा (Vadodara) से लोकसभा सांसद डॉ. हेमांग जोशी की एक बेहद प्रेरक और लीक से हटकर कहानी। यह सफर सिर्फ एक राजनेता का नहीं है, बल्कि जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV), पोरबंदर के एक ऐसे साधारण छात्र का है, जिसने अपने सपनों की ऊंची उड़ान के लिए 'एजुकेशन लोन' (Education Loan) तक का सहारा लिया और फिर मुड़कर पीछे नहीं देखा।
JNV पोरबंदर से शुरुआत और मेडिकल की कठिन पढ़ाई
डॉ. हेमांग जोशी ने अपनी कक्षा 6 से लेकर 12वीं (साइंस स्ट्रीम) तक की पूरी पढ़ाई जवाहर नवोदय विद्यालय, पोरबंदर से सफलतापूर्वक पूरी की। नवोदय के उसी अनुशासित माहौल में उनके भीतर देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी का बीज बोया गया था।
स्कूली शिक्षा शानदार तरीके से पूरी करने के बाद उन्होंने मेडिकल के क्षेत्र में कदम रखा और बड़ौदा मेडिकल कॉलेज से अपनी 'फिजियोथेरेपी' (Physiotherapy) की डिग्री हासिल की।
(यहाँ एक बेहद दिलचस्प और सुखद बात यह है कि डॉ. हेमांग की जीवनसंगिनी (पत्नी) भी उनके साथ JNV पोरबंदर में कक्षा 6 से 12 तक पढ़ी हैं और आज वह भी एक नामी मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर के तौर पर कार्यरत हैं!)
करियर में बड़ा बदलाव (Pivot) और एजुकेशन लोन का संघर्ष
फिजियोथेरेपी की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब हेमांग जी महाराजा सयाजीराव (MS) यूनिवर्सिटी पहुंचे, तो वहां उनकी सोच ने एक बड़ी करवट ली। उन्हें गहराई से महसूस हुआ कि दुनिया सिर्फ क्लिनिक और अस्पतालों तक सीमित नहीं है; मेडिकल के अलावा भी कई ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ उतरकर वे समाज में एक बड़ा बदलाव ला सकते हैं। उनकी रुचि धीरे-धीरे 'ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट' (HR) और 'सोशल वर्क' (समाज सेवा) की ओर बढ़ने लगी।
उन्होंने अपने माता-पिता को दृढ़ता से बताया कि वे अब MHRM (Master of Human Resource Management) करना चाहते हैं। लेकिन उस समय उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी कि वे सेल्फ-फाइनेंस (Self-Finance) कोर्स की भारी-भरकम फीस अपनी जेब से चुका सकें। ऐसे मुश्किल समय में भी हेमांग जी ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे, बल्कि एक 'एजुकेशन लोन' (Education Loan) लिया और अपने दम पर अपनी मास्टर डिग्री पूरी की। पढ़ाई के बाद उन्होंने एक बड़ी US मल्टीनेशनल कंपनी (MNC) में नौकरी भी की।
छात्र राजनीति और 'स्वच्छ भारत अभियान' का वायरल एंथम
नौकरी और कॉर्पोरेट दुनिया की चकाचौंध के बीच भी उनके भीतर बैठा 'नवोदयन' कभी शांत नहीं हुआ। डॉ. हेमांग की गहरी रुचि छात्र राजनीति और समाज सेवा में लगातार बनी रही:
- छात्र राजनीति में परचम: उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) जॉइन की और अपनी यूनिवर्सिटी में पूरे जोश के साथ चुनाव लड़कर बड़ी जीत भी हासिल की। यहीं से उनके अंदर एक कुशल नेता (Leader) के गुण निखरने लगे।
- लेखन का जुनून: उन्हें लिखने का बहुत शौक (Passion) है। जब आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 'स्वच्छ भारत अभियान' लॉन्च किया था, तब हेमांग जी ने अपनी रचनात्मकता का परिचय देते हुए स्वच्छता पर एक बेहद शानदार 'गुजराती फोक एंथम' (Folk Anthem) लिखा था— "स्वच्छता नो सनेडो"। इस प्रेरणादायक गीत को तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने स्वयं लॉन्च किया था।
देश के सबसे युवा वाइस चेयरमैन से 'सांसद' तक की उड़ान
अपनी अटूट लगन, बेदाग छवि और समाज सेवा के जज़्बे की बदौलत उन्होंने बेहद तेजी से तरक्की की। वह एक बोर्ड मेंबर बने और फिर पूरे देश में 'सबसे युवा वाइस चेयरमैन' (Youngest Vice Chairman) के तौर पर अपना दायित्व पूरी निष्ठा के साथ निभाया।
उनके इसी युवा जोश, साफ विजन और समर्पण को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 2024 के लोकसभा चुनावों में उन्हें 'वडोदरा' (Vadodara) से अपना प्रत्याशी घोषित किया। और आज, वह उसी वडोदरा से भारी मतों से जीतकर संसद (Parliament of India) के सदनों में अपने क्षेत्र के लोगों की आवाज़ बुलंद कर रहे हैं!
नवोदय और उन माता-पिता के लिए एक बेहद भावुक संदेश
देश के सर्वोच्च सदन में पहुंचने के बावजूद डॉ. हेमांग जोशी अपनी सफलता का पूरा श्रेय आज भी अपनी जड़ों यानी JNV को देते हैं। वीडियो के अंत में वह उन सभी अभिभावकों के लिए एक बहुत ही भावुक बात कहते हैं:
डॉ. हेमांग जोशी की यह कहानी हमारे छात्रों और अभिभावकों को यह कड़ा संदेश देती है कि 'ईमानदारी से की गई पढ़ाई कभी बेकार नहीं जाती'। अगर आपमें समाज के लिए कुछ बड़ा करने का ज़ुनून है और आप रिस्क (जैसे करियर बदलना या एजुकेशन लोन लेना) लेने से नहीं घबराते हैं, तो आप एक क्लिनिक के डॉक्टर से लेकर देश के नीति-निर्माता (सांसद) तक, कुछ भी बन सकते हैं। बस अपने सपनों और अपनी शिक्षा पर अटल भरोसा रखें!
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