गाँव से न्यूयॉर्क की उड़ान: डिक्शनरी से साइंस पढ़ने वाला लड़का कैसे बना MNC में मैनेजर?
"मेरी अंग्रेजी (English) बहुत कमज़ोर है, क्या मैं बड़े शहरों के अमीर बच्चों के सामने टिक पाऊंगा? क्या मैं कभी किसी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी (MNC) में नौकरी कर पाऊंगा?"
अक्सर हमारे ग्रामीण इलाकों और कस्बों से आने वाले बच्चों के मन में यह खौफनाक सवाल सबसे ऊपर होता है। भाषा का यह डर अच्छे-अच्छे टैलेंटेड बच्चों के सपनों को निगल जाता है। लेकिन आज नवोदय पाठशाला के इस विशेष ब्लॉग में हम आपकी इसी झिझक और डर को हमेशा के लिए चकनाचूर करने वाले हैं।
यह अद्भुत कहानी है जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV), नौल्था (पानीपत) के 2009 बैच के छात्र दीपक मलिक की, जो आज अपनी अटूट मेहनत और 'देसी आत्मविश्वास' के दम पर दुनिया के सबसे बड़े शहरों में से एक— न्यूयॉर्क (अमेरिका) की एक मल्टीनेशनल कंपनी में बतौर 'डिसीजन एनालिटिक्स मैनेजर' (Decision Analytics Manager) कार्यरत हैं।
नवोदय की मिट्टी से 'डीपीएस' (DPS) की चकाचौंध तक का सफर
दीपक जी ने अपने जीवन की मजबूत नींव JNV पानीपत में रखी, जहाँ उन्होंने 10वीं तक की पढ़ाई पूरी की। नवोदय में उनकी ज़िंदगी सादगी और अनुशासन के इर्द-गिर्द घूमती थी। इसके बाद 11वीं और 12वीं की उच्च पढ़ाई के लिए उनका दाखिला शहर के सबसे नामी और महंगे स्कूल 'डीपीएस (DPS) पानीपत' में हो गया।
नवोदय के उस ग्रामीण और सादे परिवेश से निकलकर जब वह डीपीएस की चकाचौंध में पहुंचे, तो यह उनके जीवन का एक बहुत बड़ा सांस्कृतिक बदलाव (Cultural Transition) था। डीपीएस में ज्यादातर बच्चे बेहद संपन्न, अमीर परिवारों से थे और फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते थे। दीपक जी बताते हैं कि, "हम सभी नवोदय के बच्चों में एक बात बहुत आम होती है कि हमारी अंग्रेजी और ग्रामर थोड़ी कमज़ोर होती है," और ठीक यही चुनौती अब एक बड़ी दीवार बनकर उनके सामने भी खड़ी थी।
डिक्शनरी के पन्नों में तलाशा फिजिक्स और केमिस्ट्री का भविष्य
डीपीएस में पढ़ाई का माध्यम पूरी तरह से इंग्लिश (English Medium) था। जो विज्ञान (Science) नवोदय में हिंदी या मिली-जुली भाषा में समझ आ जाता था, वह अब पूरी तरह अंग्रेजी के भारी-भरकम शब्दों में बदल चुका था।
शुरुआत में हालात इतने कठिन थे कि दीपक को फिजिक्स (Physics), केमिस्ट्री (Chemistry) और गणित (Maths) की किताबें पढ़ने के लिए अपने साथ एक डिक्शनरी (शब्दकोश) लेकर बैठना पड़ता था! वह एक-एक अंग्रेजी शब्द का अर्थ डिक्शनरी में खोजते, उसे समझते और फिर अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ाते।
कोई और होता तो इस 'भाषा' के दबाव में आकर टूट जाता या अपना स्ट्रीम बदल लेता। लेकिन दीपक ने कभी भी खुद को उन फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाले अमीर बच्चों से 'कम नहीं आंका'। नवोदय विद्यालय ने बचपन से ही उन्हें परिवार से दूर रहकर संघर्ष करने और हर विपरीत परिस्थिति में ढलने का जो 'एटीट्यूड' (Attitude) दिया था, उसी ने उन्हें हार नहीं मानने दी।
अंग्रेजी की 'Fluency' पर भारी पड़ा नवोदयन का 'Confidence'
डिक्शनरी से विज्ञान पढ़ने वाला वह लड़का नहीं रुका। 12वीं के बाद दीपक जी ने अपनी शानदार मेहनत के दम पर पंजाब यूनिवर्सिटी (PU, चंडीगढ़) से केमिकल इंजीनियरिंग की कठिन पढ़ाई पूरी की।
इंजीनियरिंग के बाद जब वह कॉर्पोरेट दुनिया की बड़ी कंपनियों में इंटरव्यू देने गए, तो वहां भी अंग्रेजी सबसे अहम भाषा थी क्योंकि सारा काम अमेरिकी और विदेशी क्लाइंट्स (US Clients) के साथ करना था। दीपक जी ईमानदारी से बताते हैं कि उस समय भी उनकी अंग्रेजी बहुत फर्राटेदार (Fluent) नहीं थी। लेकिन, उनके अंदर जो 'आत्मविश्वास' (Confidence) और समस्याओं को सुलझाने की क्षमता थी, उसने अंग्रेजी की हर कमी को कवर कर लिया।
इंटरव्यू पैनलिस्ट ने उनके रटे हुए वाक्यों को नहीं, बल्कि उनके दिमाग और जज़्बे को देखा। अपनी इसी मेहनत के कारण आज वे पिछले 10 सालों से एक बड़ी MNC में काम कर रहे हैं और वर्तमान में न्यूयॉर्क (New York) जैसे शहर में एक बेहद ऊंचे और सम्मानजनक पद पर तैनात हैं।
ग्रामीण छात्रों के लिए दीपक जी के 3 अचूक 'सक्सेस मंत्र'
अपनी इस शानदार यात्रा के अनुभव से दीपक जी ने नवोदय और ग्रामीण परिवेश के बच्चों के लिए बहुत ही शानदार संदेश दिए हैं:
- अंग्रेजी सिर्फ एक भाषा है, कोई हवा नहीं: किसी की फर्राटेदार अंग्रेजी देखकर अपना दमखम या आत्मविश्वास कभी कम न होने दें। अंग्रेजी सिर्फ एक कम्युनिकेशन का माध्यम है, आपके टैलेंट का थर्मामीटर नहीं।
- अवसर का पूरा फायदा उठाएं: अगर आपको JNV या सैनिक स्कूल जैसे शानदार संस्थानों में पढ़ने का मौका मिल रहा है, जहाँ रहना-खाना और बेहतरीन शिक्षा सब मुफ्त मिल रहा है, तो अपना 100% झोंक दें। यही समय आपका पूरा भविष्य लिखेगा।
- 'संघ शक्ति युगे युगे': इसका अर्थ है कि 'संगठन में ही शक्ति है'। अपनी जड़ों से हमेशा जुड़े रहें। अपने दोस्तों, जूनियर्स और समाज का मार्गदर्शन करते रहें, क्योंकि एक-दूसरे का हाथ पकड़कर ही हम सब आगे बढ़ सकते हैं।
दीपक मलिक जी का हरियाणा के एक छोटे से गाँव से लेकर अमेरिका के न्यूयॉर्क तक का यह सफर हमारे छात्रों को यह सिखाता है कि जीवन में सफल होने के लिए 'परफेक्ट इंग्लिश' या 'अमीर बैकग्राउंड' होना कतई जरूरी नहीं है। अगर आपके इरादे पक्के हैं और आपमें डिक्शनरी लेकर भी किताबें पढ़ने का जज़्बा है, तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको ऊंचाइयों तक पहुंचने से नहीं रोक सकती!
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